शुक्रवार, 24 मई 2013

सुँदर वचन

सू वचन ान का सार होते ह। हमारे मनीिषय, िवान, महापुष, नीित के अनुभव, दशन और परपव िवचार से हमारा जीवनपथ शत होता है। सूियाँ हमारी मानसकता व िवचार का िनमाण करती ह। अनेक अवसर व परथितय म ये िकसी सुद् िम क भाँित हमारा पथ-दशन करती ह। जीवन के महवपूण िनणय क पूव-पीिठका तैयार करती ह। सू वचन क महानता, महा एवं उपयोिगता को देखते हए तुत कृित तैयार क गई है। अयंत पठनीय, यावहारक व संहणीय सूिय का संह। अमर सूियाँ अंतःकरण अछा अंतःकरण सवम ईवर है। टामस फुलर अंतान अंतान दशन क एक मा कसौटी है। िशवानंद अंधकार मुझे अंधकार से काश क ओर ले चलो। बृहदारयक उपिनषद् अि अि वण को परखती है, संकट वीर पुष को। अात अछा वाय अछा वाय एवं अछी समझ जीवन के दो सवम वरदान ह। यूलयस साइरस अान अान से बढ़कर कोई अंधकार नह है। शेसिपयर अानी अानी का संग नह करना चािहए। आचारांग अित अित से अमृत भी िवष बन जाता है। लोकोि सभी वतुओं क अित दोष उप करती है। भवभूित अधक खाने से मनुय मशान जाता है। लोकोि अितथ अितथ का अितय करना े धम है। अवघोष अितथ सबके आदर का पा होता है। अात दर म दर वो है जो अितथ का सकार न करे। ितववर अयाचार अयाचार सदा ही दुबलता है। जेस रसेल लावेल अधक अधक का अधक फल होता है। अात अधकार अधकार जताने से अधकार स नह होता। रवीनाथ ठाकुर अधकार केवल एक है और वह है सेवा का अधकार, कतय पालन का अधकार। संपूणानंद अययन अययन उास का और योयता का कारण बनता है। बेकन अययन आनंद, अलंकार तथा योयता के लए उपयोगी है। बेकन अनंत जीवन अनंत जीवन का एकमा पाथेय है धम। रवनाथ ठाकुर अनुभव अनुभव को खरीदने क तुलना म उसे दूसर से माँग लेना अधक अछा है। चास कैलब काटन िबना अनुभव के कोरा शादक ान अंधा है। वामी िववेकानंद अनुशासन अनुशासन परकार क अि है, जससे ितभा योयता बन जाती है। अात अभय अभय ही है। बृहदारयक उपिनषद् अभाव अभाव म अभाव है-बुि का अभाव। दूसरे अभाव को संसार अभाव नह मानता। ितववर अिभमान अिभमान को जीत से नता जात् होती है। महावीर वामी शुभाथय को अिभमान नह होता। कहण अिभमान करना अानी का लण है। सूकृतांग अिभमानी िबना जाने हठ पूवक काय करनेवाला अिभमानी िवनाश को ा होता है। सोमदेव अयास कोई ऐसी वतु नह, है जो अयास करने पर भी दुकर हो। बोधचयावतार अथशा सचा अथशा तो याय बुि पर आधारत अथशा है। महामा गाँधी अवगुण अवगुण नाव क पदी के छेद के समान है, जो चाहे छोटा हो या बड़ा, एक िदन उसे डुबो देगा। कालदास पराय धन का अपरहण, परी के साथ संसग, सुद पर अित शंका- ये तीन दोष िवनाशकारी ह। वामीिक अवसर जो अवसर को समय पर पकड़ ले, वही सफल होता है। अवसर उनक मदद कभी नह करता जो अपनी मदद वयं नह करते। कहावत असंभव ‘असंभव’ एक शद है, जो मूख के शदकोश म पाया जाता है। नेपोलयन असमय असमय िकया हआ काय न िकया हआ जैसा ही है। अात अहंकार अहंकार छोड़े िबना सचा ेम नह िकया जा सकता। वामी िववेकानंद तलवार मारे एक बार, अहसान मारे बार-बार। लोकोि अिहंसा अिहंसा परम े मानव-धम है, पशु-बल से वह अनंत गुना महान् और उच है। महामा गाँधी आँख अकेली आँख ही बता सकती है िक दय म ेम है अथवा घृणा। ितववर आँसू जो और के लए रोते है, उनके आँसू भी हीर क चमक को हरा देते ह। रांगेय राघव आह वयं पर आह करो, अनुकरण मत करो। एमसन आचरण छोटी निदयाँ शोर करती ह और बड़ी निदयाँ शांत चुपचाप बहती ह। सुिनपात आचरण दपण के समान है, जसम हर मनुय अपना ितिबंब िदखाता है। आमिववास आमिववास सफलता का थम रहय है। एमसन आमसमान आमसमान रखना सफलता क सीढ़ी पर पग रखना है। अात आमा यह आमा है। बृहदारयकोपिनषद् मनुय क आमा उसके भाय से अधक बड़ी होती है। अरिवंद आमक शि आमक शि ही वातिवकता शि है। िशवानंद आदश आदश कभी नह मरते। भािगनी िनवेिदता आनंद आनंद का मूल है-संतोष। मनुमृित आनंद वह खुशी है जसके भोगन पर पछतावा नह होता। सुकरात पढ़कर आनंद के अितरेक से आँख यिद नीली न हो जाएँ तो वह कहानी कैसी ? शरचं आपदा-आप आपदा एक ऐसी वतु है जो हम अपने जीवन क गहराइय म अंति दान करती है। िववेकानंद आभूषण नारी का आभूषण शील और लजा है। बा आभूषण उसक शोभा नह बढा सकते ह। बृहकपभाय आय यय िविा, चतुराई और बुिमानी क बात यही है िक मनुय अपनी आय से कम यय करे। अात आरोय आरोय परम लाभ है, संतोष परम धन है, िववास परम बंधु है, िनवाण परम सुख है। धमपद धम, अथ, काम और मो का धान कारण आरोय है। चरक संिहता आलय br> आलय मनुय के शरीर म रहने वाला घोर शु है। भतृहर आलय दरता का मूल है। यजुवद आवयकता आवयकता अिवकार क जननी है। लोकोि आवयकता से अधक बोलना यथ है। तुकाराम असीम आवयकता नह, तृणा होती है। जैन अिवकार आिवकार से आिवकार का जम होता है। एमसन आशा आशा और आमिववास ही वे वतुएँ ह जो हमारी शिय को जात करती ह। वेट माडन यनशील मनुय के लए सदा आशा है। आसि िवषय के ित आसि मोह उतप करती है। भ

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