एकलड़कािवदेशम धनकमाने गया...वहाँ से उसने अपनीमाँ कोअपनीिदनचया बताई... सुबहउठकरघरकसाफ़सफाई, िफरनान, िफरपूजापाठ, िफरनाताबनाना, िफर घरके सभीदरवाजे अछे से बंदकरके घरकोसुरितकरके, कामपरजाना, आते समय सजीभाजीकखरीदारी, घरआकरखानाबनाना, खाकरबतनसाफ़करना. िफरभु का नामलेकरसोजाना. माँ ने पुछा: बेटाघरके बाथमभीतुमसाफ़करते हो? बेटे ने कहाँ : हाँ माँ, माँ ने पुछा: बेटाझाड़ू-पछाभीसबतुहीकोकरनापड़ताह ? बेटे ने कहाँ : हाँ माँ, माँ ने पूछा: बेटाघरकसुरा, िहसाब-िकताब, िफरपूजापाठभीसबतू करताह ? बेटे ने कहाँ : हाँ माँ.....सबकुछम हीकरताहँ माँ ने कहाबेटातू तोअबइंसानहोगयारे. बेटे ने आचय से पूछा: इंसानबनगयामतलब? तबमाँ ने कहा: तू चारवणं के कामिबनािकसीसंकोचके वयं करताह...पंिडतकाभी... शुकाभी... वैयकाभीऔरियकाभी... मुझे गव ह कतू जाितवादऔरवणवादसेबहतऊपरउठकरअबइंसानबनगयाह
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