गांधी जी के समग्र शैक्षिक
विचार (क्रमशः)
गांधी के विचारों को
लेकर हम सबके मन में हमेशा एक द्वंद बना ही रहा है चाहे वह सकारात्मक हो या
नकारात्मक ? जहाँ तक उनके शैक्षिक विचारों की बात की जाए तो सिद्धांत रूप से तो
उनकी बड़ी छवि के नीचे उनके सारे विचारों को जस का तस स्वीकार तो कर लिया गया
...पर उनका वास्तविक प्रयोग कहीं नहीं किया गया ।

हमारी प्रणाली में उनके बुनियादी शिक्षा
या बेसिक शिक्षा का प्राथमिक स्तर पर नाम के अनुरूप तो समझ आता है की उनकी शैक्षिक
प्रणाली ही प्रयोग हो रही है ।वास्तव में जहाँ तक गांधी जी के विचारों को आत्मसात
कर पाया हूँ .......यही कहूँगा की वास्तव में गांधी जी हम सबसे कहीं ज्यादा
प्रगतिशील थे ......और शायद वह आज जीवित होते तो अपनी शैक्षिक प्रणाली में स्वयं
समयानुरूप आमूल -चूल परिवर्तन कर चुके होते ।
पर अफ़सोस हम अभी भी
उनके नाम को सम्मान देने के नाम पर किसी परिवर्तन को स्वीकार करने से पीछे हट रहे
हैं ।
इसी कड़ी के तहत
चिट्ठे पर गांधी जी के समग्र शैक्षिक विचारों को क्रमशः प्रकाशित किया जायेगा
......... जाहिर है कि मूल रूप से मेरा श्रेय केवल प्रस्तुत करने से ही है आपके और
अपने विचारों को भी इसी कड़ी में जोड़कर पुनर्प्रकाशित करने का भी विचार है
........ आपका क्या विचार है ?
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