रविवार, 22 सितंबर 2013

बेटी दिवस

 बेटे या बेटियां
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      बोए जाते है बेटे
    और उग आती हैं बेटियां

 खाद पानी बेटों में
और लहलहाती हैं बेटियां

एवेरेस्ट की ऊँचाइयों तक ठेले जाते हैं बेटे
और चढ़ जाती हैं बेटियां

                                                                                        रुलाते हैं बेटे
और रोती हैं बेटियां

        कई तरह गिरते और गिराते हैं बेटे
और संभाल लेती हैं बेटियां

सुख के स्वपन दिखाते हैं बेटे
जीवन का यथार्थ होती हैं बेटियां


जीवन तो बेटों का है
  और मारी जाती हैं बेटियां

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