प्रकृति परिचय (राजकीय प्राथमिक विद्यालय – गवालगाँव) शैक्षिक भ्रमण
दिनांक - ०२/०४/२०१३
आज दिनांक ०२/०४/२०१३ को राजकीय प्राथमिक विद्यालय गवालगाँव का
शैक्षिक भ्रमण किरगनी से शुरू हुआ | छात्रों का उत्साह देखने लायक था,सभी बच्चे
कोतुहलबस इधर उधर प्रकृति को निहार रहे थे | हमने ड्राइवर से गाड़ी को सुल्या धार
से कोटि कालोनी के लिए प्रस्थान करने को कहा, गाड़ी कच्ची रोड पर हिचकोले खाती हुई
आगे बढ़ी | बच्चे डरने लगे,हमने सभी छात्रों को समझाया कि हम भी तुम्हारे साथ हैं
तब सभी छात्र सहज भाव से बैठ गए और प्रकृति का आनंद लेने लगे | सबसे पहले हम कोटि
कालोनी पहुंचे | वहां पर रूककर हम सभी छात्रों को लेकर झील के किनारे गए | इतनी
बड़ी झील छात्रों ने पहली बार देखी | वे झील को विस्मय भरी दृष्टि से देख रहे थे
उनके मुहँ से वाह इतनी बड़ी झील!!!!!! सुनकर हमें भी खुशी का अहसास हो रहा था |
उसके बाद हमने उन्हें बोट दिखाई शायद
उन्होंने बोट पहली बार देखी और कोतुहलबश वे प्रश्न करने लगे कि यह पानी पर कैसे
चलती है?
उनकी उत्शुकता को देखते हुए असवाल जी ने छात्रों को बताया कि इसमें
मशीन लगी है जिसके कारण नाव को धक्का देकर वोट आगे बढती है |
फिर हम सभी कोटि कालोनी से आगे बढ़े, और झील का विहंगम दृश्य देखते हुए
सभी छात्र आपस में विचार विमर्श कर रहे थे कि आगे हमें क्या दिखाया जायेगा | हमने
गाड़ी भागीरथी पुरम में रोकी जहाँ से सभी बच्चों ने टिहरी डैम देखा विशालकाय डैम को
देख कर उन्हें आश्चर्य हो रहा था | सभी बच्चे प्रश्न करने लगे कि यहाँ बिजली कैसे
पैदा होती है? तब हमने बताया कि पावर हाउस के अंधर बड़ी बड़ी टरबाईन लगी हुई जिनके
चलने से बिजली पैदा होती है और पावर हाउस से अन्य स्थानों को भेजी जाती है | फिर
हम बच्चों को भागीरथी पुरम के गेस्ट हाउस में ले गए जहाँ से सभी बच्चों ने टिहरी
का अवलोकन किया | सभी बच्चों से प्रश्न किया गया कि पुरानी टिहरी कहाँ पर थी लेकिन
बच्चे नहीं बता सके क्योकि झील के पानी में उनको पुरानी टिहरी का आभास नहीं हो रहा
था | फिर हमने बच्चों को अनुमान के आधार पर सभी बच्चों को बताया कि पुरानी टिहरी
झील के बीचों बीच थी | यहाँ के विहंगम दृश्यों की फोटो ग्राफी की गई |तत्पश्चात हम
बच्चों को लेकर नई टिहरी के लिए प्रस्थान
किये रास्ते में सभी बच्चे दिखाए गए स्थानों के बारे में बाते कर रहे थे |
हम सभी बच्चों को लेकर उनके धार्मिक स्थान टिहरी मस्जिद में ले गए जहाँ पर उनको
बताया गया कि यह स्थान पवित्र और आस्थाओं से जुड़ा हुआ है हमें सभी धर्मों का सामान
रूप से आदर करना चाहिए |
इसके पश्चात हमने सभी
बच्चों को दोपहर का भोजन करवाया तथा थोड़ी देर आराम किया | उसके बाद हम टिहरी जेल
देखने गए | यहाँ पर भी बच्चों द्वारा प्रश्न किया गया कि जेल क्यों और किसके लिए
बनाई गई है| तब हमने सभी बच्चों को बताया कि भूल वश कोई ब्यक्ति अपराध कर देता है
तो उसे न्यालय के द्वारा सजा दे दी जाती है उन्हीं के लिए जेल बनाई जाती है जहाँ
पर उनको सुधारा जाता है और अच्छा नागरिक बनाया जाता है और समाज कि मुख्यधारा से
जोड़ा जाता है |
उसके बाद हम बच्चों को टिहरी मुख्यालय ले गए जहाँ पर उनको जिला
अधिकारी कार्यालय कोर्ट बैंक और अन्य विभागों के कार्यालयों भी दिखाया गया | यहाँ
पर हमने सभी छात्रों को बताया कि अब हम सब चम्बा के लिए प्रस्थान करेगे | थोड़ी देर
हमने सभी बच्चों को चम्बा में घुमाया वहां पर सभी बच्चों ने शहीद गब्बर सिंह की
प्रतिमा देखी और उनके समन्ध मेभी प्रश्न पूछे सभी को बताया गया कि गब्बर सिंह
गढ़वाल रेजिमेंट का एक बीर सिपाई था जो अपने देश के लिए शहीद हो गया जिसकी स्मृति
में हर वर्ष चम्बा में मेला लगता है और उनको याद किया जाता है |
उसके बाद हम सभी लोग अपने
गंतव्य स्थान कि ओर चल दिए | चम्बा से १० किलो मीटर दूर किरगनी पहुंचे |सभी बच्चों
को नास्ता करवाकर उनके अभिभावकों के साथ घर भेज दिया गया | ओर सभी अध्यापक भी अपने
निवास स्थान की ओर चल दि
यहीं पर यात्रा का विश्राम किया गया |
प्रस्तुत
कर्ता
(सोहन सिंह खरोला)
प्रधानाध्यापक
राजकीय
प्राथमिक विद्यालय – गवालगाँव
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